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साहेबगंज के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की सजा पर आज फैसला, 7 साल पुराने फायरिंग केस में टिकीं निगाहें

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साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की सजा पर आज दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुनाएगी। सात साल पुराने फायरिंग मामले में उन्हें गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया जा चुका है।

पटना/नई दिल्ली/आलम की खबर: बिहार की राजनीति से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज सात साल पुराने फायरिंग मामले में आज बड़ा दिन है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट शुक्रवार को उनकी सजा की अवधि पर फैसला सुनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। अदालत पहले ही विधायक को गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहरा चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोष सिद्ध होने के बाद अदालत उन्हें कितनी सजा सुनाती है।

यह मामला उस फायरिंग घटना से जुड़ा है, जिसमें डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर राजू कुमार सिंह को दोषी माना। वहीं इसी मामले में सह-आरोपी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया।

पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सजा कम रखने की मांग करते हुए कई तर्क अदालत के सामने रखे। विधायक की ओर से कहा गया कि वे लगातार छह बार जनता का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी अलग पहचान रही है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि वे डायबिटीज और किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि उनके तीन बच्चे विवाह योग्य आयु में हैं और यदि उन्हें लंबी जेल की सजा होती है तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ेगा।

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी दावा किया कि राजू कुमार सिंह का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है और यह पहला मामला है जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया है। इन्हीं आधारों पर उनके अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें जेल भेजने के बजाय प्रोबेशन का लाभ दिया जाए। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

दूसरी ओर, डॉ. अर्चना गुप्ता के परिजन अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। इस कारण आज की सुनवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि पीड़ित परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी अहम माना जा रहा है। बिहार में भाजपा के विधायक से जुड़ा मामला होने के कारण राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर भी अदालत के फैसले पर बनी हुई है। यदि अदालत कठोर सजा सुनाती है तो इसका असर विधायक की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि बचाव पक्ष की दलीलों को राहत मिलती है तो यह भी चर्चा का विषय बनेगा।

कानूनी जानकारों का कहना है कि दोषसिद्धि के बाद सजा तय करते समय अदालत अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य, दोषी की भूमिका, सामाजिक परिस्थितियों और अन्य कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखती है। इसलिए अंतिम आदेश ही यह तय करेगा कि राजू कुमार सिंह को कारावास की सजा मिलेगी या किसी अन्य कानूनी राहत पर विचार किया जाएगा।

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली आज की सुनवाई पर बिहार से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत के फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी तय होगी।

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न्यायिक फैसले पर टिकी राजनीतिक नजर

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अदालत का फैसला सर्वोपरि होता है। इस मामले में भी सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत अपना निर्णय सुनाएगी। यह फैसला केवल एक विधायक के भविष्य से नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों के भरोसे से भी जुड़ा माना जा रहा है।

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